वैदिक उपाय-परम्परा के चार स्तम्भ हैं — मंत्र-जप, दान, व्रत और रत्न-यंत्र। सही उपाय वही है जो कुंडली की असली स्थिति पर आधारित हो; अंधाधुंध रत्न या टोटके शास्त्र नहीं हैं। क्रम भी शास्त्र-सम्मत है: पहले जाँचो कि ग्रह सचमुच पीड़ित है (नीच, अस्त, दुःस्थान या दोष-भागी), फिर उसकी तीव्रता देखो, तब उपाय — निर्बल ग्रह की वस्तुओं का दान और शुभ-स्थित ग्रह की वस्तुओं का धारण, यही मूल सूत्र है। मंत्र में गिनती और शुद्ध उच्चारण, दान में पात्र और वार, व्रत में नियम-निर्वाह, रत्न में धातु-उँगली-मुहूर्त — विधि के बिना उपाय अधूरा है। इस श्रेणी के लेख हर ग्रह-स्थिति के प्रामाणिक उपाय इसी विधि-सहित बताते हैं; अपनी ग्रह-स्थिति निःशुल्क कुंडली से और लाल-किताबी उपाय-योजना टेवा-tool से जाँचें।
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