आर्द्रा नक्षत्र प्रथम चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
आर्द्रा नक्षत्र प्रथम चरण — स्थिति व नवांश
आर्द्रा नक्षत्र का प्रथम चरण मिथुन राशि के 6°40′ से 10°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र धनु नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी गुरु है।
नक्षत्र-स्वामी राहु और चरण (नवांश) का स्वामी गुरु परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।
धनु-नवांश का रंग: ज्ञान, धर्म, गुरु, संतान, धन, भाग्य, विवेक के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
आर्द्रा के जातक तीव्र भावनाओं और गहन चिंतन वाले होते हैं — रुद्र का नक्षत्र आँधी-सा है: झकझोरता है पर वातावरण स्वच्छ भी करता है। जीवन में परिवर्तन-बिंदु प्रबल रहते हैं; टूटकर नया बनना इनकी नियति व शक्ति दोनों है। अश्रु के बाद की स्वच्छता ही आर्द्रा है।
चरण-विशेष: धनु नवांश की अग्नि-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «कू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (आर्द्रा के चारों चरणों के अक्षर: कू, घ, ङ, छ)
करियर-दिशा
technology-IT, research, मनोविज्ञान, आपदा-प्रबंधन, औषधि व परिवर्तन-प्रधान क्षेत्र आर्द्रा को फलते हैं। पुरानी व्यवस्था तोड़कर नई बनाने वाले काम इनके हैं। भावनात्मक स्थिरता के लिए ध्यान-अभ्यास विशेष सहायक रहेगा।
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