अश्विनी नक्षत्र चतुर्थ चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
अश्विनी नक्षत्र चतुर्थ चरण — स्थिति व नवांश
अश्विनी नक्षत्र का चतुर्थ चरण मेष राशि के 10°00′ से 13°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कर्क नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी चंद्र है।
नक्षत्र-स्वामी केतु और चरण (नवांश) का स्वामी चंद्र परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।
कर्क-नवांश का रंग: मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
अश्विनी के जातक तेज़, फुर्तीले और सदा नयी शुरुआत को तत्पर रहते हैं — देव-वैद्य अश्विनीकुमारों का नक्षत्र होने से इनमें उपचार व सहायता की सहज वृत्ति होती है। युवा-सी ऊर्जा जीवनभर बनी रहती है। उतावलेपन और अधूरे काम छोड़ने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण ज़रूरी है।
चरण-विशेष: कर्क नवांश की जल-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «ला» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (अश्विनी के चारों चरणों के अक्षर: चू, चे, चो, ला)
गंडमूल-विचार
अश्विनी गंडमूल नक्षत्रों में है — इस चरण में जन्म हो तो परंपरा जन्म के 27वें दिन मूल-शांति की सलाह देती है; चरण-अनुसार तीव्रता भिन्न मानी जाती है। भयभीत होने की आवश्यकता नहीं — विस्तार नीचे लिंक में।
करियर-दिशा
चिकित्सा-उपचार, आपात-सेवा, परिवहन-वाहन, खेल, यात्रा-उद्योग व हर वह काम जहाँ तेज़ी चाहिए — अश्विनी जातकों को फलता है। ये pioneers हैं; नयी चीज़ पहले अपनाते हैं। धैर्य माँगने वाले दीर्घ-प्रकल्पों में साथी ज़रूर रखें।
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