भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
भरणी नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश
भरणी नक्षत्र का द्वितीय चरण मेष राशि के 16°40′ से 20°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कन्या नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी बुध है।
नक्षत्र-स्वामी शुक्र और चरण (नवांश) का स्वामी बुध परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।
कन्या-नवांश का रंग: बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
भरणी के जातक दृढ़-संकल्पी, जीवन-मृत्यु जैसे गहरे विषयों को समझने वाले और भार उठाने की अद्भुत क्षमता वाले होते हैं — यम का नक्षत्र इन्हें अनुशासन व नैतिक-बोध देता है। भीतर तीव्र रचनात्मक-ऊर्जा रहती है। हठ और अति-भोग की प्रवृत्ति से सावधान रहें।
चरण-विशेष: कन्या नवांश की पृथ्वी-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «लू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (भरणी के चारों चरणों के अक्षर: ली, लू, ले, लो)
करियर-दिशा
प्रजनन-शिशु सेवा, कला-मनोरंजन, hospitality, क़ानून-न्याय, HR व प्रबंधन भरणी के अनुकूल क्षेत्र हैं। ज़िम्मेदारी निभाने में ये अग्रणी हैं — कठिन दायित्व इन्हें ही सौंपे जाते हैं। कार्य-जीवन संतुलन सचेत होकर साधें।
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