बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय
बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप
विंशोत्तरी क्रम में बुध की महादशा 17 वर्ष चलती है — यह काल बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर चंद्र की अंतर्दशा 1 वर्ष 5 माह की होती है (सूत्र: 17×10÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय चंद्र (मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता) तय करता है।
महादशा-स्वामी बुध के अध्याय में चंद्र अपने कारकत्व — मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता — के विषय सामने लाता है। बुध चंद्र को शत्रु मानता है — अवधि में खींचतान/मत-परिवर्तन सामान्य है; धैर्य रखें।
फल कैसे पढ़ें — असली नियम
फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: चंद्र जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; बुध की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।
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इस अवधि के सामान्य उपाय
चंद्र (अंतर्दशा-स्वामी): चंद्र को बल देने हेतु सोमवार व्रत, 'ॐ चंद्राय नमः' या शिव-पूजन (चंद्र शिव के मस्तक पर), माता की सेवा तथा जल व दूध का दान श्रेष्ठ है। रत्न मोती (Pearl) चाँदी में, कनिष्ठा में, सोमवार धारण किया जाता है। सफ़ेद वस्तुएँ (चावल, दूध, चाँदी) का दान और मन को शांत रखने वाले ध्यान-अभ्यास विशेष लाभकारी हैं।
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