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बुध महादशा में शुक्र अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय

बुध महादशा में शुक्र अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप

विंशोत्तरी क्रम में बुध की महादशा 17 वर्ष चलती है — यह काल बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर शुक्र की अंतर्दशा 2 वर्ष 10 माह की होती है (सूत्र: 17×20÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय शुक्र (प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख) तय करता है।

महादशा-स्वामी बुध के अध्याय में शुक्र अपने कारकत्व — प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख — के विषय सामने लाता है। दोनों की नैसर्गिक मैत्री से यह अवधि प्रायः सहयोगी रहती है।

फल कैसे पढ़ें — असली नियम

फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: शुक्र जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; बुध की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।

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इस अवधि के सामान्य उपाय

शुक्र (अंतर्दशा-स्वामी): शुक्र को बल देने हेतु शुक्रवार व्रत, 'ॐ शुक्राय नमः' जप, लक्ष्मी-पूजन तथा स्त्री-जाति व कलाकारों का सम्मान श्रेष्ठ है। रत्न हीरा (Diamond) या श्वेत-पुखराज सोने/प्लैटिनम में, शुक्रवार धारण किया जाता है। श्वेत/सुगंधित वस्तुएँ (चावल, इत्र, चाँदी) का दान तथा कला-संगीत का अभ्यास विशेष लाभकारी है।

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