चित्रा नक्षत्र प्रथम चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
चित्रा नक्षत्र प्रथम चरण — स्थिति व नवांश
चित्रा नक्षत्र का प्रथम चरण कन्या राशि के 23°20′ से 26°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र सिंह नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी सूर्य है।
नक्षत्र-स्वामी मंगल और चरण (नवांश) का स्वामी सूर्य परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।
सिंह-नवांश का रंग: आत्मा, पिता, राजा/सरकार, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, नेतृत्व के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
चित्रा के जातक चमकदार व्यक्तित्व, सौंदर्य-दृष्टि और निर्माण-प्रतिभा वाले होते हैं — विश्वकर्मा का नक्षत्र भीतर वास्तुकार बैठा रखता है। साधारण को सुंदर बना देना इनकी कला है। बाहरी चमक के साथ भीतरी गहराई भी उतनी ही है — लोग देर से समझ पाते हैं।
चरण-विशेष: सिंह नवांश की अग्नि-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «पे» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (चित्रा के चारों चरणों के अक्षर: पे, पो, रा, री)
करियर-दिशा
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