🌳 ग्रह-फल

हस्त नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

हस्त नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश

हस्त नक्षत्र का तृतीय चरण कन्या राशि के 16°40′ से 20°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मिथुन नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी बुध है।

नक्षत्र-स्वामी चंद्र और चरण (नवांश) का स्वामी बुध परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।

मिथुन-नवांश का रंग: बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

हस्त के जातक हाथ के हुनर वाले, चतुर, विनोदी और व्यावहारिक होते हैं — सविता का नक्षत्र 'हाथों में सिद्धि' देता है। कारीगरी, गणना, उपचार — जो छू लें, सँवर जाता है। मन कभी-कभी चंचल व चिंतित रहता है; हाथ व्यस्त रहें तो मन शांत रहता है।

चरण-विशेष: मिथुन नवांश की वायु-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «ण» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (हस्त के चारों चरणों के अक्षर: पू, ष, ण, ठ)

करियर-दिशा

हस्तकला-शिल्प, चिकित्सा (विशेषकर surgery/therapy), लेखन-टंकण, accounting, magic-मनोरंजन व कौशल-प्रधान हर क्षेत्र हस्त के लिए श्रेष्ठ है। इनके बनाए काम में सफ़ाई दिखती है। कौशल को बार-बार upgrade करते रहना ही इनकी सुरक्षा है।

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