कृत्तिका नक्षत्र चतुर्थ चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
कृत्तिका नक्षत्र चतुर्थ चरण — स्थिति व नवांश
कृत्तिका नक्षत्र का चतुर्थ चरण वृषभ राशि के 6°40′ से 10°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मीन नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी गुरु है।
नक्षत्र-स्वामी सूर्य और चरण (नवांश) का स्वामी गुरु परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।
मीन-नवांश का रंग: ज्ञान, धर्म, गुरु, संतान, धन, भाग्य, विवेक के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
कृत्तिका के जातक तीक्ष्ण-बुद्धि, स्पष्टवादी और अन्याय पर तुरंत बोलने वाले होते हैं — अग्नि-देव का नक्षत्र भीतर शुद्ध करने वाली आँच रखता है। ये काटकर सत्य कहते हैं, पर हृदय पोषक है — जैसे अग्नि भोजन पकाती है। वाणी की तीक्ष्णता ही साधना का विषय है।
चरण-विशेष: मीन नवांश की जल-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «ए» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (कृत्तिका के चारों चरणों के अक्षर: अ, इ, उ, ए)
करियर-दिशा
रसोई-भोजन उद्योग, सेना-सुरक्षा, धातु-अभियांत्रिकी, आलोचना-संपादन, शिक्षा व नेतृत्व-भूमिकाएँ कृत्तिका को फलती हैं। गुणवत्ता से समझौता इन्हें स्वीकार नहीं। टीम में इनकी समीक्षा सोना है — बस कहने का ढंग नरम रखें।
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