मघा नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
मघा नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश
मघा नक्षत्र का द्वितीय चरण सिंह राशि के 3°20′ से 6°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र वृषभ नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शुक्र है।
नक्षत्र-स्वामी केतु और चरण (नवांश) का स्वामी शुक्र परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।
वृषभ-नवांश का रंग: प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
मघा के जातक राजसी स्वभाव, कुल-गौरव की भावना और नेतृत्व की जन्मजात आभा वाले होते हैं — पितरों का नक्षत्र विरासत व परंपरा से गहरा जुड़ाव देता है। सम्मान इन्हें प्राणों-सा प्रिय है। पूर्वजों का आशीर्वाद विशेष फलदायी माना जाता है; अभिमान से बचें।
चरण-विशेष: वृषभ नवांश की पृथ्वी-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «मी» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (मघा के चारों चरणों के अक्षर: मा, मी, मू, मे)
गंडमूल-विचार
मघा गंडमूल नक्षत्रों में है — इस चरण में जन्म हो तो परंपरा जन्म के 27वें दिन मूल-शांति की सलाह देती है; चरण-अनुसार तीव्रता भिन्न मानी जाती है। भयभीत होने की आवश्यकता नहीं — विस्तार नीचे लिंक में।
करियर-दिशा
प्रशासन, राजनीति, इतिहास-पुरातत्व, पारिवारिक-व्यवसाय व सम्मान-सूचक पद मघा के अनुकूल हैं। ये कुर्सी सँभालना जानते हैं। पितृ-कार्य व परंपरा-सम्मान इनके भाग्य को विशेष बल देता है — जड़ों से जुड़े रहें।
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