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🌳 ग्रह-फल

बुध महादशा (17 वर्ष) — फल, अंतर्दशा-क्रम व उपाय

महादशा का फल-स्वभाव

विंशोत्तरी-क्रम में बुध की महादशा 17 वर्ष चलती है। इस काल में जीवन पर बुद्धि, वाणी और व्यापार का रंग चढ़ता है — बुध कुंडली में जिन भावों का स्वामी है और जहाँ बैठा है, वही विषय इन वर्षों के मुख्य अध्याय बनते हैं। दशा-आरंभ की पहली अंतर्दशा (स्वयं बुध की) में यह रंग धीरे-धीरे खुलता है।

शुभ-स्थित बनाम पीड़ित

केंद्र-त्रिकोण का स्वामी होकर बलवान बैठा बुध अपनी दशा में उन्नति-काल देता है; त्रिक (6-8-12) से जुड़ा या अस्त-नीच-पीड़ित बुध उन्हीं वर्षों को परीक्षा-काल बना देता है। इसीलिए दशा का फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से पढ़ा जाता है — निःशुल्क कुंडली में अपनी दशा-तालिका और बुध की स्थिति एक साथ देखिए।

अंतर्दशा-क्रम व अवधि

महादशा के भीतर नौ अंतर्दशाएँ इसी क्रम से चलती हैं (अवधि = महादशा-वर्ष × अंतर्दशा-वर्ष ÷ 120):

बुध-बुध अंतर्दशा: 2 वर्ष 5 माह

बुध-केतु अंतर्दशा: 1 वर्ष

बुध-शुक्र अंतर्दशा: 2 वर्ष 10 माह

बुध-सूर्य अंतर्दशा: 10 माह

बुध-चंद्र अंतर्दशा: 1 वर्ष 5 माह

बुध-मंगल अंतर्दशा: 1 वर्ष

बुध-राहु अंतर्दशा: 2 वर्ष 7 माह

बुध-गुरु अंतर्दशा: 2 वर्ष 3 माह

बुध-शनि अंतर्दशा: 2 वर्ष 8 माह

हर जोड़ी का विस्तृत फल कोश के दशा-जोड़ी पन्नों (बुध-अंतर्दशा शृंखला) में अलग से दिया है।

उपाय व आराधना

बुध-दशा में परम्परागत उपाय: «ॐ बुं बुधाय नमः», बुधवार को मूँग-हरा वस्त्र, गणेश-वंदना। रत्न-विचार सदा कुंडली दिखाकर — बुध शुभ-कारक हो तभी उसका रत्न धारण करें।

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