तुला राशि में मंगल: फल, गरिमा व उपाय
तुला राशि में मंगल — गरिमा (dignity)
तुला का स्वामी शुक्र मंगल के लिए सम है — फल मध्यम-संतुलित रहते हैं; निर्णायक भूमिका भाव-स्थिति और दृष्टियों की होती है।
तत्व-मेल और स्वभाव पर प्रभाव
तुला वायु-तत्व की चर राशि है, जबकि मंगल अग्नि-तत्व का ग्रह — दोनों तत्वों का यह संवाद स्वभाव में अपनी अलग रंगत लाता है: राशि का वातावरण मंगल के कारकत्व को अपने ढंग से ढालता है।
मंगल (क्रूर) यहाँ भाई, साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त, पराक्रम, विवाद के विषयों को तुला के गुणों — तुला वायु-तत्व की चर राशि है — शुक्र के स्वामित्व से इसके जातक संतुलन-प्रिय, सौंदर्य-बोधी, कूटनीतिज्ञ और न्यायप्रिय होते हैं। हर पक्ष को तौल… — के रंग में प्रकट करता है।
फल कब और कैसे मिलेगा
यह राशि-स्थिति किस भाव में पड़ी है — यही सबसे बड़ा निर्णायक है: वही मंगल तुला में लग्न में हो तो व्यक्तित्व पर, दशम में हो तो करियर पर बोलता है। फल मंगल की महादशा-अंतर्दशा में और गोचर-सम्पर्क के समय मुखर होता है।
नवांश (D9) में इसकी स्थिति दूसरी कसौटी है — वहाँ बल हो तो बाहर की साधारण स्थिति भी असाधारण फल दे जाती है।
मंगल के सामान्य उपाय
मंगल को बल/शांति देने हेतु मंगलवार व्रत, हनुमान-चालीसा पाठ, 'ॐ अंगारकाय नमः' जप तथा हनुमान-पूजन श्रेष्ठ है। रत्न मूँगा (Red Coral) ताँबे/सोने में, अनामिका में, मंगलवार धारण किया जाता है। मसूर-दाल, लाल वस्त्र व गुड़ का दान तथा क्रोध-प्रबंधन विशेष लाभकारी है; मांगलिक-दोष हेतु कुंभ-विवाह आदि परिहार शास्त्र-सम्मत हैं। रत्न-धारण सदा कुंडली-परामर्श के बाद ही करें।
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