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मूल नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

मूल नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश

मूल नक्षत्र का तृतीय चरण धनु राशि के 6°40′ से 10°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मिथुन नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी बुध है।

नक्षत्र-स्वामी केतु और चरण (नवांश) का स्वामी बुध परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।

मिथुन-नवांश का रंग: बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

मूल के जातक जड़ तक जाने वाले, निर्भीक अन्वेषक और मोह-बंधन तोड़ने की शक्ति वाले होते हैं — निर्ऋति का नक्षत्र पुराने को उखाड़कर ही नया बोने देता है। जीवन में आमूल परिवर्तन आते हैं और हर बार ये अधिक गहरे होकर निकलते हैं। दर्शन-अध्यात्म में गति स्वाभाविक है।

चरण-विशेष: मिथुन नवांश की वायु-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «भा» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (मूल के चारों चरणों के अक्षर: ये, यो, भा, भी)

गंडमूल-विचार

मूल गंडमूल नक्षत्रों में है — इस चरण में जन्म हो तो परंपरा जन्म के 27वें दिन मूल-शांति की सलाह देती है; चरण-अनुसार तीव्रता भिन्न मानी जाती है। भयभीत होने की आवश्यकता नहीं — विस्तार नीचे लिंक में।

करियर-दिशा

research, चिकित्सा (विशेषकर मूल-कारण खोजने वाली), अध्यात्म-दर्शन, जाँच-एजेंसियाँ, औषधि व mining-drilling जैसे क्षेत्र मूल को फलते हैं। सतही काम इन्हें रुचता ही नहीं। बार-बार सब शून्य से शुरू करने का साहस ही इनकी विशिष्ट पूँजी है।

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