पुनर्वसु नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
पुनर्वसु नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश
पुनर्वसु नक्षत्र का तृतीय चरण मिथुन राशि के 26°40′ से 0°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मिथुन नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी बुध है।
नक्षत्र-स्वामी गुरु और चरण (नवांश) का स्वामी बुध परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।
मिथुन-नवांश का रंग: बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
पुनर्वसु के जातक आशावादी, उदार और हर स्थिति से लौट आने की क्षमता (resilience) वाले होते हैं — अदिति का नक्षत्र 'पुनः प्रकाश' का वचन है। भटककर घर लौटना, खोकर पुनः पाना — यही इनकी कथा है। सरलता व संतोष इनका आभूषण है; लक्ष्य-दृढ़ता बढ़ाएँ।
चरण-विशेष: मिथुन नवांश की वायु-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «हा» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (पुनर्वसु के चारों चरणों के अक्षर: के, को, हा, ही)
करियर-दिशा
शिक्षा-अध्यापन, अध्यात्म, परामर्श, प्रकाशन, यात्रा व पुनर्निर्माण से जुड़े क्षेत्र पुनर्वसु के अनुकूल हैं। ये संस्थाओं को संकट से उबारने वाले माने जाते हैं। बार-बार नई शुरुआत की सुविधा है, पर एक दिशा पकड़कर चलने से बड़ा फल मिलेगा।
यह स्थिति आपकी अपनी कुंडली में है या नहीं — ग्रह, दशा व घटना-समय सहित तुरंत निःशुल्क जाँचें।
निःशुल्क कुंडली बनाएँ →पुनर्वसु नक्षत्र का पूर्ण परिचय · नक्षत्र-स्वामी गुरु का परिचय · अपना जन्म-नक्षत्र व चरण जानें (निःशुल्क) · नवांश (D9) क्या है · राशि-नक्षत्र अनुसार बच्चों के नाम