रेवती नक्षत्र चतुर्थ चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
रेवती नक्षत्र चतुर्थ चरण — स्थिति व नवांश
रेवती नक्षत्र का चतुर्थ चरण मीन राशि के 26°40′ से 0°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मीन नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी गुरु है।
नक्षत्र-स्वामी बुध और चरण (नवांश) का स्वामी गुरु परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।
मीन-नवांश का रंग: ज्ञान, धर्म, गुरु, संतान, धन, भाग्य, विवेक के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
रेवती के जातक करुणामय, पालक, सबको साथ लेकर चलने वाले और यात्रा के रक्षक होते हैं — पूषा का नक्षत्र राह दिखाने वाला अंतिम प्रकाश है। नक्षत्र-चक्र का समापन होने से परिपक्व, क्षमाशील आत्मा का भाव रहता है। दूसरों में इतना न खो जाएँ कि स्वयं की राह छूट जाए।
चरण-विशेष: मीन नवांश की जल-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «ची» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (रेवती के चारों चरणों के अक्षर: दे, दो, चा, ची)
गंडमूल-विचार
रेवती गंडमूल नक्षत्रों में है — इस चरण में जन्म हो तो परंपरा जन्म के 27वें दिन मूल-शांति की सलाह देती है; चरण-अनुसार तीव्रता भिन्न मानी जाती है। भयभीत होने की आवश्यकता नहीं — विस्तार नीचे लिंक में।
करियर-दिशा
शिक्षा (विशेषकर बाल-शिक्षा), चिकित्सा-सेवा, यात्रा-उद्योग, पशु-सेवा, कला-संगीत व charity रेवती के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। खोए को राह दिखाना इनका धर्म है। आर्थिक व्यवहार में व्यावहारिकता रखें — करुणा और हिसाब अलग-अलग खाते हैं।
यह स्थिति आपकी अपनी कुंडली में है या नहीं — ग्रह, दशा व घटना-समय सहित तुरंत निःशुल्क जाँचें।
निःशुल्क कुंडली बनाएँ →गंडमूल नक्षत्र — अर्थ व शांति · रेवती नक्षत्र का पूर्ण परिचय · नक्षत्र-स्वामी बुध का परिचय · अपना जन्म-नक्षत्र व चरण जानें (निःशुल्क) · नवांश (D9) क्या है · राशि-नक्षत्र अनुसार बच्चों के नाम