🌳 ग्रह-फल

रोहिणी नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

रोहिणी नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश

रोहिणी नक्षत्र का द्वितीय चरण वृषभ राशि के 13°20′ से 16°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र वृषभ नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शुक्र है।

नक्षत्र-स्वामी चंद्र और चरण (नवांश) का स्वामी शुक्र परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।

वृषभ-नवांश का रंग: प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

रोहिणी के जातक आकर्षक, कलात्मक, भौतिक सुख-सुविधाओं के रसिक और स्थिर-मन होते हैं — चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र होने से सौंदर्य व माधुर्य जन्मजात है। उर्वरता व विकास इसका मूल भाव है — जो सींचते हैं, बढ़ता है। मोह व आराम-प्रियता में न बहें।

चरण-विशेष: वृषभ नवांश की पृथ्वी-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «वा» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (रोहिणी के चारों चरणों के अक्षर: ओ, वा, वी, वू)

करियर-दिशा

कृषि-बाग़वानी, food-व्यवसाय, कला-संगीत-अभिनय, fashion-सौंदर्य, real estate व finance रोहिणी के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। इनके हाथ में बरकत मानी जाती है — व्यवसाय जमाने की क्षमता विशेष है। विलासिता-ख़र्च पर अंकुश रखें।

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