शुक्र महादशा में बुध अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय
शुक्र महादशा में बुध अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप
विंशोत्तरी क्रम में शुक्र की महादशा 20 वर्ष चलती है — यह काल प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर बुध की अंतर्दशा 2 वर्ष 10 माह की होती है (सूत्र: 20×17÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय बुध (बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा) तय करता है।
महादशा-स्वामी शुक्र के अध्याय में बुध अपने कारकत्व — बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा — के विषय सामने लाता है। दोनों की नैसर्गिक मैत्री से यह अवधि प्रायः सहयोगी रहती है।
फल कैसे पढ़ें — असली नियम
फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: बुध जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; शुक्र की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।
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इस अवधि के सामान्य उपाय
बुध (अंतर्दशा-स्वामी): बुध को बल देने हेतु बुधवार व्रत, 'ॐ बुधाय नमः' जप, विष्णु/गणेश-पूजन तथा विद्या-दान (पुस्तक/शिक्षा) श्रेष्ठ है। रत्न पन्ना (Emerald) सोने/चाँदी में, कनिष्ठा में, बुधवार धारण किया जाता है। हरी वस्तुएँ (मूँग, हरा वस्त्र) का दान, कन्याओं/विद्यार्थियों की सहायता तथा नियमित अध्ययन विशेष लाभकारी है।
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