मोती चंद्रमा का रत्न है — मन, माता, स्मृति और भावनात्मक स्थिरता का कारक। कुंडली में चंद्र क्षीण, नीच (वृश्चिक) या पाप-पीड़ित हो — मन की चंचलता, अनिद्रा, चिंता — तो मोती चंद्र-बल बढ़ाकर मन को शीतल और स्थिर करता है। विष-योग (चंद्र-शनि) और साढ़ेसाती के मानसिक भार में भी परंपरा से इसका विचार होता है।
सोमवार को शुक्ल-पक्ष में, चाँदी में, दाएँ हाथ की कनिष्ठा (छोटी उँगली) में धारण की परंपरा है। अभिमंत्रण «ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः» से। भार प्रायः सवा 2 से सवा 5 रत्ती (कुंडली-अनुसार)।
🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
विस्तार से पढ़ें: चंद्र ग्रह — कारकत्व, दशा-फल व उपाय
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