सात-मुखी रुद्राक्ष महालक्ष्मी का स्वरूप है — शनि इसका ग्रह है। यह दरिद्रता-नाश और समृद्धि का रुद्राक्ष माना जाता है; शनि-शांति (साढ़ेसाती-ढैया) के साथ धन-स्थिरता के लिए परंपरा-प्रसिद्ध।
सोमवार को प्रातः स्नान के बाद, लाल/पीले धागे या चाँदी में, «ॐ नमः शिवाय» व नीचे दिए बीज-मंत्र के जप से धारण की परंपरा है। धारण से पहले गंगाजल-दुग्ध से शुद्धि व शिव-पूजन शुभ माना जाता है। रुद्राक्ष सोते समय व अशौच में उतारने की परंपरा है।
बीज-मंत्र: «ॐ हुं नमः»
हर रुद्राक्ष प्रयोगशाला-परखा व प्रमाणित (X-ray/असली-नक़ली जाँच) होता है।
🕉 हमारा वचन: हर रुद्राक्ष ग्रह-देवता के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
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