चार-मुखी रुद्राक्ष सृष्टिकर्ता ब्रह्मा का स्वरूप है — बुध इसका ग्रह है। यह विद्या, वाणी और सृजन-बुद्धि का रुद्राक्ष है — विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों और वक्ताओं में विशेष प्रचलित।
सोमवार को प्रातः स्नान के बाद, लाल/पीले धागे या चाँदी में, «ॐ नमः शिवाय» व नीचे दिए बीज-मंत्र के जप से धारण की परंपरा है। धारण से पहले गंगाजल-दुग्ध से शुद्धि व शिव-पूजन शुभ माना जाता है। रुद्राक्ष सोते समय व अशौच में उतारने की परंपरा है।
बीज-मंत्र: «ॐ ह्रीं नमः»
हर रुद्राक्ष प्रयोगशाला-परखा व प्रमाणित (X-ray/असली-नक़ली जाँच) होता है।
🕉 हमारा वचन: हर रुद्राक्ष ग्रह-देवता के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
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हाँ — रुद्राक्ष में स्त्री-पुरुष का भेद नहीं; मासिक-धर्म में उतारना केवल व्यक्तिगत परंपरा है।
सोमवार सुबह स्नान के बाद, या शिवरात्रि/श्रावण में; «ॐ ह्रीं नमः» 108 बार जपें।