नीलम शनि का रत्न है — कर्म, न्याय, अनुशासन और दीर्घ-परिश्रम का कारक; नवरत्नों में सबसे तीव्र-प्रभावी माना जाता है। कुंडली में शनि शुभ-कारक होकर निर्बल हो, या साढ़ेसाती-ढैया में शनि का सहयोग चाहिए, तो नीलम अनुकूल पड़ने पर तेज़ और ठोस परिणाम देता है — रुके काम खुलना, पद-स्थिरता, न्याय-पक्ष में बल।
⚠️ नीलम कभी सीधे धारण नहीं किया जाता — परंपरा में पहले 3 दिन परख (तकिये के नीचे/बाँह पर बाँधकर) की जाती है; अनुकूल लगे तभी शनिवार को चाँदी/पंचधातु में मध्यमा में धारण। अभिमंत्रण «ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः» से। सूर्य-चंद्र-मंगल के रत्नों (माणिक्य, मोती, मूँगा) के साथ प्रायः नहीं पहना जाता। भार सवा 3 से सवा 6 रत्ती।
🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
विस्तार से पढ़ें: शनि ग्रह · साढ़ेसाती — चरण व उपाय
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