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9 मुखी रुद्राक्ष — लाभ, किसे पहनना चाहिए, धारण-विधि, मंत्र व दाम

9 मुखी रुद्राक्ष के देवता दुर्गा (नवशक्ति) और ग्रह केतु हैं। केतु-दशा, भय-दुर्घटना-भय, साहस की कमी, लहसुनिया न पहन सकने वाले; स्त्रियों के लिए विशेष शुभ (शास्त्र-मत)।

प्रमाणित 9 मुखी रुद्राक्ष — दाम (14)

9 मुखी रुद्राक्ष के लाभ

  • निर्भयता व साहस
  • केतु-दोष व अचानक हानि से रक्षा
  • दुर्गा-कृपा — शत्रु व नकारात्मकता से रक्षा
  • ऊर्जा व गतिशीलता

9 मुखी रुद्राक्ष की धारण-विधि

सोमवार सुबह स्नान के बाद दाने को कच्चे दूध व गंगाजल से शुद्ध करें, धूप-दीप दिखाकर «ॐ ह्रीं हुं नमः» 108 बार जपें और लाल/पीले धागे या चाँदी में गले/कलाई में धारण करें। मांस-मद्य से दूर रहें; सोते समय, शौच व श्मशान जाते समय उतार सकते हैं; समय-समय पर सरसों/चंदन के तेल से पोषण दें।

मंत्र

ॐ ह्रीं हुं नमः — 108 बार प्रतिदिन

असली रुद्राक्ष की पहचान

प्राकृतिक छिद्र (ड्रिल नहीं), ऊपर से नीचे तक साफ़ मुखी-रेखाएँ, घना दाना पानी में डूबे, दरार न हो; दाने के साथ प्रमाणपत्र।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या महिलाएँ 9 मुखी रुद्राक्ष पहन सकती हैं?

हाँ — रुद्राक्ष में स्त्री-पुरुष का भेद नहीं; मासिक-धर्म में उतारना केवल व्यक्तिगत परंपरा है।

9 मुखी रुद्राक्ष किस दिन धारण करें?

सोमवार सुबह स्नान के बाद, या शिवरात्रि/श्रावण में; «ॐ ह्रीं हुं नमः» 108 बार जपें।

क्या इसे अन्य मुखी या रत्न के साथ पहन सकते हैं?

रुद्राक्ष आपस में प्रायः सुरक्षित हैं; रत्न के साथ ग्रह-नियम देखें — अपनी कुंडली के लिए ज्योतिषी से पूछें।

9 मुखी रुद्राक्ष का दाम कितना है?

आकार, मूल (नेपाल/इंडोनेशिया) व गुणवत्ता पर — नीचे प्रमाणित दाने दाम-सहित।

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रत्न व रुद्राक्ष के प्रभाव शास्त्र व परंपरा के अनुसार हैं; ये चिकित्सा का विकल्प नहीं हैं।