🌳 ग्रह-फल

अनुराधा नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

अनुराधा नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश

अनुराधा नक्षत्र का तृतीय चरण वृश्चिक राशि के 10°00′ से 13°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र तुला नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शुक्र है।

नक्षत्र-स्वामी शनि और चरण (नवांश) का स्वामी शुक्र परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।

तुला-नवांश का रंग: प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

अनुराधा के जातक मैत्री-कुशल, भक्त-हृदय, संगठन-क्षमता वाले और विपरीत परिस्थिति में भी खिलने वाले होते हैं — मित्र देवता का नक्षत्र कीचड़ में कमल खिलाता है। दूर देश व भिन्न लोगों से सफलता के योग विशेष हैं। अपनों से सम्मान देर से मिले तो निराश न हों।

चरण-विशेष: तुला नवांश की वायु-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «नू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (अनुराधा के चारों चरणों के अक्षर: ना, नी, नू, ने)

करियर-दिशा

संगठन-प्रबंधन, विदेश-सम्बन्धी कार्य, group-नेतृत्व, अध्यात्म, आँकड़े-विज्ञान व मैत्री-आधारित व्यवसाय अनुराधा के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। टीम जोड़ना इनका हुनर है। घर से दूर भाग्य विशेष खुलता है — अवसर आए तो झिझकें नहीं।

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