अनुराधा नक्षत्र चतुर्थ चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
अनुराधा नक्षत्र चतुर्थ चरण — स्थिति व नवांश
अनुराधा नक्षत्र का चतुर्थ चरण वृश्चिक राशि के 13°20′ से 16°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र वृश्चिक नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी मंगल है।
नक्षत्र-स्वामी शनि और चरण (नवांश) का स्वामी मंगल परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।
वृश्चिक-नवांश का रंग: भाई, साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त, पराक्रम, विवाद के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
अनुराधा के जातक मैत्री-कुशल, भक्त-हृदय, संगठन-क्षमता वाले और विपरीत परिस्थिति में भी खिलने वाले होते हैं — मित्र देवता का नक्षत्र कीचड़ में कमल खिलाता है। दूर देश व भिन्न लोगों से सफलता के योग विशेष हैं। अपनों से सम्मान देर से मिले तो निराश न हों।
चरण-विशेष: वृश्चिक नवांश की जल-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «ने» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (अनुराधा के चारों चरणों के अक्षर: ना, नी, नू, ने)
करियर-दिशा
संगठन-प्रबंधन, विदेश-सम्बन्धी कार्य, group-नेतृत्व, अध्यात्म, आँकड़े-विज्ञान व मैत्री-आधारित व्यवसाय अनुराधा के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। टीम जोड़ना इनका हुनर है। घर से दूर भाग्य विशेष खुलता है — अवसर आए तो झिझकें नहीं।
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