वृषभ राशि में चंद्र: फल, गरिमा व उपाय
वृषभ राशि में चंद्र — गरिमा (dignity)
वृषभ चंद्र की उच्च राशि है — यह इस ग्रह की सर्वोत्तम स्थिति मानी जाती है। चंद्र के कारकत्व (मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता) अपने पूर्ण, परिपक्व रूप में फलते हैं।
तत्व-मेल और स्वभाव पर प्रभाव
वृषभ पृथ्वी-तत्व की स्थिर राशि है, जबकि चंद्र जल-तत्व का ग्रह — दोनों तत्वों का यह संवाद स्वभाव में अपनी अलग रंगत लाता है: राशि का वातावरण चंद्र के कारकत्व को अपने ढंग से ढालता है।
चंद्र (सौम्य) यहाँ मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता के विषयों को वृषभ के गुणों — वृषभ स्थिर पृथ्वी-तत्व राशि है — इसके जातक धैर्यवान, व्यावहारिक और विश्वसनीय होते हैं। शुक्र के स्वामित्व से सौंदर्य, कला, संगीत और अच्छे भो… — के रंग में प्रकट करता है।
फल कब और कैसे मिलेगा
यह राशि-स्थिति किस भाव में पड़ी है — यही सबसे बड़ा निर्णायक है: वही चंद्र वृषभ में लग्न में हो तो व्यक्तित्व पर, दशम में हो तो करियर पर बोलता है। फल चंद्र की महादशा-अंतर्दशा में और गोचर-सम्पर्क के समय मुखर होता है।
नवांश (D9) में इसकी स्थिति दूसरी कसौटी है — वहाँ बल हो तो बाहर की साधारण स्थिति भी असाधारण फल दे जाती है।
चंद्र के सामान्य उपाय
चंद्र को बल देने हेतु सोमवार व्रत, 'ॐ चंद्राय नमः' या शिव-पूजन (चंद्र शिव के मस्तक पर), माता की सेवा तथा जल व दूध का दान श्रेष्ठ है। रत्न मोती (Pearl) चाँदी में, कनिष्ठा में, सोमवार धारण किया जाता है। सफ़ेद वस्तुएँ (चावल, दूध, चाँदी) का दान और मन को शांत रखने वाले ध्यान-अभ्यास विशेष लाभकारी हैं। रत्न-धारण सदा कुंडली-परामर्श के बाद ही करें।
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