वृश्चिक राशि में चंद्र: फल, गरिमा व उपाय
वृश्चिक राशि में चंद्र — गरिमा (dignity)
वृश्चिक चंद्र की नीच राशि है — कारकत्व (मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता) को फलने में संघर्ष रहता है। पर घबराइए नहीं: नीच-भंग की स्थितियाँ (जैसे मंगल का केंद्र में होना या उच्च चंद्र की दृष्टि) इसे राजयोग तक बदल देती हैं — और नवांश में बल हो तो बाहर की कमज़ोरी भीतर की गहराई बन जाती है।
तत्व-मेल और स्वभाव पर प्रभाव
वृश्चिक जल-तत्व की राशि है और चंद्र भी जल-तत्व का ग्रह — समान तत्व का यह मेल स्वभाव को एकरस और प्रबल करता है।
चंद्र (सौम्य) यहाँ मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता के विषयों को वृश्चिक के गुणों — वृश्चिक जल-तत्व की स्थिर राशि है — मंगल के स्वामित्व से इसके जातक गहन, दृढ़-निश्चयी, रहस्यमय और तीव्र इच्छा-शक्ति वाले होते हैं। सतह पर शांत… — के रंग में प्रकट करता है।
फल कब और कैसे मिलेगा
यह राशि-स्थिति किस भाव में पड़ी है — यही सबसे बड़ा निर्णायक है: वही चंद्र वृश्चिक में लग्न में हो तो व्यक्तित्व पर, दशम में हो तो करियर पर बोलता है। फल चंद्र की महादशा-अंतर्दशा में और गोचर-सम्पर्क के समय मुखर होता है।
नवांश (D9) में इसकी स्थिति दूसरी कसौटी है — वहाँ बल हो तो बाहर की साधारण स्थिति भी असाधारण फल दे जाती है।
चंद्र के सामान्य उपाय
चंद्र को बल देने हेतु सोमवार व्रत, 'ॐ चंद्राय नमः' या शिव-पूजन (चंद्र शिव के मस्तक पर), माता की सेवा तथा जल व दूध का दान श्रेष्ठ है। रत्न मोती (Pearl) चाँदी में, कनिष्ठा में, सोमवार धारण किया जाता है। सफ़ेद वस्तुएँ (चावल, दूध, चाँदी) का दान और मन को शांत रखने वाले ध्यान-अभ्यास विशेष लाभकारी हैं। रत्न-धारण सदा कुंडली-परामर्श के बाद ही करें।
यह स्थिति आपकी अपनी कुंडली में है या नहीं — ग्रह, दशा व घटना-समय सहित तुरंत निःशुल्क जाँचें।
निःशुल्क कुंडली बनाएँ →वृश्चिक राशि का पूर्ण परिचय · चंद्र ग्रह का विस्तृत लेख · चंद्र — गुण-तालिका · अपनी कुंडली में देखें · नवांश (D9) क्या है