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🌳 ग्रह-फल

मंगल की दृष्टि — किन भावों पर पड़ती है और क्या फल देती है

दृष्टि का नियम

वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह अपने से सातवीं राशि/भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है — मंगल भी। दृष्टि का अर्थ है: ग्रह अपनी ऊर्जा उस भाव पर बिना वहाँ बैठे डालता है, इसलिए फलादेश में युति के बाद दृष्टि ही सबसे बड़ा प्रभाव-माध्यम है। मंगल को इसके अतिरिक्त चौथी व आठवीं दृष्टियाँ भी प्राप्त हैं — यही उसे विशेष बनाती हैं।

मंगल की दृष्टि का फल-स्वभाव

मंगल जिस भाव को देखता है वहाँ ऊर्जा, साहस और संघर्ष का रंग चढ़ता है — शुभ-स्थित मंगल उस क्षेत्र को सँवारता है, पीड़ित मंगल वहीं चुनौती जोड़ता है। दृष्ट भाव के कारक, भावेश और वहाँ बैठे ग्रहों से मिलाकर ही अंतिम फल कहा जाता है।

विशेष दृष्टियों का फल

मंगल की चौथी दृष्टि घर-वाहन-भूमि के भाव को उग्र ऊर्जा देती है — वहाँ पराक्रम भी, विवाद भी; आठवीं दृष्टि आयु-गूढ़ता के भाव पर पड़कर आकस्मिकता व शल्य-प्रसंग जोड़ती है। दोनों दृष्टियों में मंगल जिस भाव को देखे, वहाँ जल्दबाज़ी टालने की सलाह शास्त्र देता है।

व्यावहारिक सूत्र

दृष्टि सदैव राशि-चक्र में गिनी जाती है और अंश जितने निकट, प्रभाव उतना सघन। अपनी कुंडली में देखिए मंगल किन भावों को देख रहा है — वही क्षेत्र उसकी दशा-अंतर्दशा में सबसे पहले हिलते हैं। मंगल के भाव-फल कोश के मंगल-भाव पन्नों में विस्तार से हैं।

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