🌳 ग्रह-फल

ज्येष्ठा नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

ज्येष्ठा नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश

ज्येष्ठा नक्षत्र का द्वितीय चरण वृश्चिक राशि के 20°00′ से 23°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मकर नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शनि है।

नक्षत्र-स्वामी बुध और चरण (नवांश) का स्वामी शनि परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।

मकर-नवांश का रंग: कर्म, न्याय, आयु, अनुशासन, सेवक, दुःख, तेल-लोहा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

ज्येष्ठा के जातक बड़े दायित्व वहन करने वाले, रक्षक-वृत्ति के और गूढ़-बुद्धि होते हैं — इंद्र का नक्षत्र 'सबसे बड़े' का पद व उसकी अकेली लड़ाइयाँ दोनों देता है। कम उम्र से परिपक्व हो जाते हैं। पद का अहं और भीतर का अकेलापन — दोनों को साधना ही ज्येष्ठा की यात्रा है।

चरण-विशेष: मकर नवांश की पृथ्वी-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «या» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (ज्येष्ठा के चारों चरणों के अक्षर: नो, या, यी, यू)

गंडमूल-विचार

ज्येष्ठा गंडमूल नक्षत्रों में है — इस चरण में जन्म हो तो परंपरा जन्म के 27वें दिन मूल-शांति की सलाह देती है; चरण-अनुसार तीव्रता भिन्न मानी जाती है। भयभीत होने की आवश्यकता नहीं — विस्तार नीचे लिंक में।

करियर-दिशा

प्रशासन-नेतृत्व, सुरक्षा-सेवाएँ, occult, संकट-प्रबंधन व वरिष्ठ-पद ज्येष्ठा के अनुकूल हैं। कठिन समय में सब इन्हीं की ओर देखते हैं। अधीनस्थों को श्रेय देना सीखें — इससे इनका नेतृत्व अजेय बनता है।

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