ज्येष्ठा नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
ज्येष्ठा नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश
ज्येष्ठा नक्षत्र का तृतीय चरण वृश्चिक राशि के 23°20′ से 26°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कुंभ नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शनि है।
नक्षत्र-स्वामी बुध और चरण (नवांश) का स्वामी शनि परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।
कुंभ-नवांश का रंग: कर्म, न्याय, आयु, अनुशासन, सेवक, दुःख, तेल-लोहा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
ज्येष्ठा के जातक बड़े दायित्व वहन करने वाले, रक्षक-वृत्ति के और गूढ़-बुद्धि होते हैं — इंद्र का नक्षत्र 'सबसे बड़े' का पद व उसकी अकेली लड़ाइयाँ दोनों देता है। कम उम्र से परिपक्व हो जाते हैं। पद का अहं और भीतर का अकेलापन — दोनों को साधना ही ज्येष्ठा की यात्रा है।
चरण-विशेष: कुंभ नवांश की वायु-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «यी» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (ज्येष्ठा के चारों चरणों के अक्षर: नो, या, यी, यू)
गंडमूल-विचार
ज्येष्ठा गंडमूल नक्षत्रों में है — इस चरण में जन्म हो तो परंपरा जन्म के 27वें दिन मूल-शांति की सलाह देती है; चरण-अनुसार तीव्रता भिन्न मानी जाती है। भयभीत होने की आवश्यकता नहीं — विस्तार नीचे लिंक में।
करियर-दिशा
प्रशासन-नेतृत्व, सुरक्षा-सेवाएँ, occult, संकट-प्रबंधन व वरिष्ठ-पद ज्येष्ठा के अनुकूल हैं। कठिन समय में सब इन्हीं की ओर देखते हैं। अधीनस्थों को श्रेय देना सीखें — इससे इनका नेतृत्व अजेय बनता है।
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