सिंह राशि में केतु: फल, गरिमा व उपाय
सिंह राशि में केतु — गरिमा (dignity)
सिंह का स्वामी सूर्य केतु के लिए सम है — फल मध्यम-संतुलित रहते हैं; निर्णायक भूमिका भाव-स्थिति और दृष्टियों की होती है।
तत्व-मेल और स्वभाव पर प्रभाव
सिंह अग्नि-तत्व की राशि है और केतु भी अग्नि-तत्व का ग्रह — समान तत्व का यह मेल स्वभाव को एकरस और प्रबल करता है।
केतु (छाया-ग्रह (मोक्ष-कारक)) यहाँ मोक्ष, अध्यात्म, वैराग्य, रहस्य, गुप्त-विद्या, अंतर्ज्ञान के विषयों को सिंह के गुणों — … — के रंग में प्रकट करता है।
फल कब और कैसे मिलेगा
यह राशि-स्थिति किस भाव में पड़ी है — यही सबसे बड़ा निर्णायक है: वही केतु सिंह में लग्न में हो तो व्यक्तित्व पर, दशम में हो तो करियर पर बोलता है। फल केतु की महादशा-अंतर्दशा में और गोचर-सम्पर्क के समय मुखर होता है।
नवांश (D9) में इसकी स्थिति दूसरी कसौटी है — वहाँ बल हो तो बाहर की साधारण स्थिति भी असाधारण फल दे जाती है।
केतु के सामान्य उपाय
केतु को शांत करने हेतु 'ॐ कें केतवे नमः' जप, गणेश-पूजन तथा भैरव/शिव-आराधना श्रेष्ठ है। रत्न लहसुनिया (Cat's Eye) चाँदी/पंचधातु में — तीव्र-प्रभावी, अतः बिना परामर्श न धारण करें। कुत्ते को भोजन, कंबल/तिल का दान, गणेश-आराधना तथा अध्यात्म-साधना विशेष लाभकारी है। रत्न-धारण सदा कुंडली-परामर्श के बाद ही करें।
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