ग्रह

केतु ग्रह: ज्योतिष में प्रभाव और उपाय

केतु दूसरा छाया ग्रह है — चंद्रमा का दक्षिण नोड, जो राहु के ठीक सामने बैठता है। जहाँ राहु संसार को चाहता है, वहीं केतु उससे विरक्त होता है। केतु आध्यात्मिकता, पूर्वजन्म के कर्म और त्याग का प्रतिनिधि है।

यह मोक्ष, अंतर्ज्ञान और अचानक, अकथनीय ज्ञान का ग्रह है।

केतु किसका कारक है

केतु वैराग्य और आध्यात्मिकता का कारक है।

मजबूत केतु के प्रभाव

शुभ स्थिति वाला केतु गहरा अंतर्ज्ञान, आध्यात्मिक गहराई, शोध-क्षमता और सतह के नीचे देखने का गुण दे सकता है। कई चिकित्सक, संत और शोधकर्ता मजबूत केतु रखते हैं।

पीड़ित केतु के प्रभाव

पीड़ित केतु भ्रम, अचानक वियोग, खोया-खोया महसूस होना, या अकारण चिंता ला सकता है।

केतु को संभालने के उपाय

उपायों का उद्देश्य केतु की बेचैन, परलौकिक ऊर्जा को स्थिर करना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केतु आध्यात्मिकता, वैराग्य, पूर्वजन्म के कर्म और अंतर्ज्ञान का प्रतिनिधि है — त्याग करने और सतह के नीचे देखने की प्रेरणा।

खोया या विरक्त महसूस होना, अचानक वियोग, या अस्पष्ट अकारण चिंताएँ प्रायः पीड़ित केतु से जुड़े हैं।

भगवान गणेश और शिव की उपासना, केतु मंत्र, दान और कुत्तों को भोजन इसकी ऊर्जा स्थिर करने हेतु व्यापक रूप से अनुशंसित है।

इन्हें भी पढ़ें

← ज्योतिष ज्ञान (सभी लेख) · निःशुल्क कुंडली · ज्योतिषी से पूछें