राहु महादशा (18 वर्ष) — फल, अंतर्दशा-क्रम व उपाय
महादशा का फल-स्वभाव
विंशोत्तरी-क्रम में राहु की महादशा 18 वर्ष चलती है। इस काल में जीवन पर तीव्र इच्छा, भ्रम और अपारम्परिक उठान का रंग चढ़ता है — राहु कुंडली में जिन भावों का स्वामी है और जहाँ बैठा है, वही विषय इन वर्षों के मुख्य अध्याय बनते हैं। दशा-आरंभ की पहली अंतर्दशा (स्वयं राहु की) में यह रंग धीरे-धीरे खुलता है।
शुभ-स्थित बनाम पीड़ित
केंद्र-त्रिकोण का स्वामी होकर बलवान बैठा राहु अपनी दशा में उन्नति-काल देता है; त्रिक (6-8-12) से जुड़ा या अस्त-नीच-पीड़ित राहु उन्हीं वर्षों को परीक्षा-काल बना देता है। इसीलिए दशा का फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से पढ़ा जाता है — निःशुल्क कुंडली में अपनी दशा-तालिका और राहु की स्थिति एक साथ देखिए।
अंतर्दशा-क्रम व अवधि
महादशा के भीतर नौ अंतर्दशाएँ इसी क्रम से चलती हैं (अवधि = महादशा-वर्ष × अंतर्दशा-वर्ष ÷ 120):
राहु-राहु अंतर्दशा: 2 वर्ष 8 माह
राहु-गुरु अंतर्दशा: 2 वर्ष 5 माह
राहु-शनि अंतर्दशा: 2 वर्ष 10 माह
राहु-बुध अंतर्दशा: 2 वर्ष 7 माह
राहु-केतु अंतर्दशा: 1 वर्ष 1 माह
राहु-शुक्र अंतर्दशा: 3 वर्ष
राहु-सूर्य अंतर्दशा: 11 माह
राहु-चंद्र अंतर्दशा: 1 वर्ष 6 माह
राहु-मंगल अंतर्दशा: 1 वर्ष 1 माह
हर जोड़ी का विस्तृत फल कोश के दशा-जोड़ी पन्नों (राहु-अंतर्दशा शृंखला) में अलग से दिया है।
उपाय व आराधना
राहु-दशा में परम्परागत उपाय: «ॐ रां राहवे नमः», शनिवार को नारियल-नीला वस्त्र, दुर्गा-सप्तशती पाठ। रत्न-विचार सदा कुंडली दिखाकर — राहु शुभ-कारक हो तभी उसका रत्न धारण करें।
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