मेष राशि में राहु: फल, गरिमा व उपाय
मेष राशि में राहु — गरिमा (dignity)
मेष का स्वामी मंगल राहु का नैसर्गिक शत्रु है — शत्रु-राशि में राहु असहज रहता है; फल विलंब या समझौते के साथ मिलते हैं। शेष कुंडली (दृष्टि, नवांश, दशा) बल दे तो यही स्थिति सँभल जाती है।
तत्व-मेल और स्वभाव पर प्रभाव
मेष अग्नि-तत्व की चर राशि है, जबकि राहु वायु-तत्व का ग्रह — दोनों तत्वों का यह संवाद स्वभाव में अपनी अलग रंगत लाता है: राशि का वातावरण राहु के कारकत्व को अपने ढंग से ढालता है।
राहु (छाया-ग्रह (क्रूर)) यहाँ माया, विदेश, तकनीक, अचानक घटनाएँ, भ्रम, महत्वाकांक्षा के विषयों को मेष के गुणों — मेष राशि-चक्र की पहली राशि है — इसके जातक जन्मजात नेतृत्व-क्षमता, साहस और पहल करने की प्रवृत्ति लेकर आते हैं। मंगल के स्वामित्व से इनमें ऊर्… — के रंग में प्रकट करता है।
फल कब और कैसे मिलेगा
यह राशि-स्थिति किस भाव में पड़ी है — यही सबसे बड़ा निर्णायक है: वही राहु मेष में लग्न में हो तो व्यक्तित्व पर, दशम में हो तो करियर पर बोलता है। फल राहु की महादशा-अंतर्दशा में और गोचर-सम्पर्क के समय मुखर होता है।
नवांश (D9) में इसकी स्थिति दूसरी कसौटी है — वहाँ बल हो तो बाहर की साधारण स्थिति भी असाधारण फल दे जाती है।
राहु के सामान्य उपाय
राहु को शांत करने हेतु 'ॐ रां राहवे नमः' जप, दुर्गा/भैरव-पूजन, सरस्वती-आराधना तथा शनिवार सेवा श्रेष्ठ है। रत्न गोमेद (Hessonite) चाँदी/पंचधातु में — तीव्र-प्रभावी, अतः बिना परामर्श न धारण करें। नीले-भूरे वस्त्र, तिल, नारियल व उड़द का दान, कोढ़ी/निर्धनों की सेवा तथा व्यसन-त्याग विशेष लाभकारी है। रत्न-धारण सदा कुंडली-परामर्श के बाद ही करें।
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