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मृगशिरा नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

मृगशिरा नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश

मृगशिरा नक्षत्र का द्वितीय चरण वृषभ राशि के 26°40′ से 0°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कन्या नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी बुध है।

नक्षत्र-स्वामी मंगल और चरण (नवांश) का स्वामी बुध परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।

कन्या-नवांश का रंग: बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

मृगशिरा के जातक जिज्ञासु, खोजी और सदा कुछ नया ढूँढ़ते रहने वाले होते हैं — हिरण जैसा कोमल, चंचल स्वभाव। यात्रा, संगीत और सुगंध प्रिय हैं। मन जल्दी ऊबता है, इसलिए विविधता चाहिए। खोज बाहर से भीतर मुड़े, तो यही नक्षत्र साधक बना देता है।

चरण-विशेष: कन्या नवांश की पृथ्वी-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «वो» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (मृगशिरा के चारों चरणों के अक्षर: वे, वो, का, की)

करियर-दिशा

research-अन्वेषण, यात्रा-पर्यटन, marketing, लेखन, संगीत, real-estate खोज व counselling मृगशिरा के अनुकूल हैं। नए रास्ते खोजने में ये अद्वितीय हैं। एक क्षेत्र में गहराई बनाना (bar-bar बदलने की जगह) इनकी उन्नति की कुंजी है।

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