🌳 ग्रह-फल

मृगशिरा नक्षत्र चतुर्थ चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

मृगशिरा नक्षत्र चतुर्थ चरण — स्थिति व नवांश

मृगशिरा नक्षत्र का चतुर्थ चरण मिथुन राशि के 3°20′ से 6°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र वृश्चिक नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी मंगल है।

नक्षत्र-स्वामी मंगल और चरण (नवांश) का स्वामी मंगल एक ही ग्रह हैं — यह चरण नक्षत्र का शुद्धतम, «वर्गोत्तम-भाव» वाला चरण माना जाता है; नक्षत्र के गुण यहाँ सबसे गहरे उतरते हैं।

वृश्चिक-नवांश का रंग: भाई, साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त, पराक्रम, विवाद के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

मृगशिरा के जातक जिज्ञासु, खोजी और सदा कुछ नया ढूँढ़ते रहने वाले होते हैं — हिरण जैसा कोमल, चंचल स्वभाव। यात्रा, संगीत और सुगंध प्रिय हैं। मन जल्दी ऊबता है, इसलिए विविधता चाहिए। खोज बाहर से भीतर मुड़े, तो यही नक्षत्र साधक बना देता है।

चरण-विशेष: वृश्चिक नवांश की जल-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «की» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (मृगशिरा के चारों चरणों के अक्षर: वे, वो, का, की)

करियर-दिशा

research-अन्वेषण, यात्रा-पर्यटन, marketing, लेखन, संगीत, real-estate खोज व counselling मृगशिरा के अनुकूल हैं। नए रास्ते खोजने में ये अद्वितीय हैं। एक क्षेत्र में गहराई बनाना (bar-bar बदलने की जगह) इनकी उन्नति की कुंजी है।

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