पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र प्रथम चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र प्रथम चरण — स्थिति व नवांश
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का प्रथम चरण धनु राशि के 13°20′ से 16°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र सिंह नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी सूर्य है।
नक्षत्र-स्वामी शुक्र और चरण (नवांश) का स्वामी सूर्य परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।
सिंह-नवांश का रंग: आत्मा, पिता, राजा/सरकार, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, नेतृत्व के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
पूर्वाषाढ़ा के जातक अजेय आत्मविश्वास, प्रेरक वाणी और जल-सी सर्वव्यापी पहुँच वाले होते हैं — 'अपराजिता' कहा गया नक्षत्र। ये हारना जानते ही नहीं; घोषणा करके जीतते हैं। दूसरों को उत्साहित करने की कला जन्मजात है। अति-आत्मविश्वास ही एकमात्र जोखिम है।
चरण-विशेष: सिंह नवांश की अग्नि-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «भू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (पूर्वाषाढ़ा के चारों चरणों के अक्षर: भू, धा, फा, ढा)
करियर-दिशा
वक्तृत्व-प्रेरक भाषण, राजनीति, जल-सम्बन्धी उद्योग, shipping, कला-प्रदर्शन व debate-क़ानून पूर्वाषाढ़ा के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। भीड़ को दिशा देना इनका काम है। वादा वही करें जो निभ सके — साख ही इनका सिंहासन है।
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