पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का तृतीय चरण धनु राशि के 20°00′ से 23°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र तुला नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शुक्र है।
नक्षत्र-स्वामी शुक्र और चरण (नवांश) का स्वामी शुक्र एक ही ग्रह हैं — यह चरण नक्षत्र का शुद्धतम, «वर्गोत्तम-भाव» वाला चरण माना जाता है; नक्षत्र के गुण यहाँ सबसे गहरे उतरते हैं।
तुला-नवांश का रंग: प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
पूर्वाषाढ़ा के जातक अजेय आत्मविश्वास, प्रेरक वाणी और जल-सी सर्वव्यापी पहुँच वाले होते हैं — 'अपराजिता' कहा गया नक्षत्र। ये हारना जानते ही नहीं; घोषणा करके जीतते हैं। दूसरों को उत्साहित करने की कला जन्मजात है। अति-आत्मविश्वास ही एकमात्र जोखिम है।
चरण-विशेष: तुला नवांश की वायु-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «फा» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (पूर्वाषाढ़ा के चारों चरणों के अक्षर: भू, धा, फा, ढा)
करियर-दिशा
वक्तृत्व-प्रेरक भाषण, राजनीति, जल-सम्बन्धी उद्योग, shipping, कला-प्रदर्शन व debate-क़ानून पूर्वाषाढ़ा के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। भीड़ को दिशा देना इनका काम है। वादा वही करें जो निभ सके — साख ही इनका सिंहासन है।
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