पुष्य नक्षत्र प्रथम चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
पुष्य नक्षत्र प्रथम चरण — स्थिति व नवांश
पुष्य नक्षत्र का प्रथम चरण कर्क राशि के 3°20′ से 6°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र सिंह नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी सूर्य है।
नक्षत्र-स्वामी शनि और चरण (नवांश) का स्वामी सूर्य परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।
सिंह-नवांश का रंग: आत्मा, पिता, राजा/सरकार, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, नेतृत्व के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
पुष्य को नक्षत्रों में सर्वाधिक शुभ माना गया है — बृहस्पति का पोषक नक्षत्र। इसके जातक धर्मपरायण, सेवा-भावी, विश्वसनीय और दूसरों का पालन-पोषण करने वाले होते हैं। गाय के थन का प्रतीक ही कहता है — देना इनका स्वभाव है। आत्म-मूल्य कम न आँकें।
चरण-विशेष: सिंह नवांश की अग्नि-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «हू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (पुष्य के चारों चरणों के अक्षर: हू, हे, हो, डा)
करियर-दिशा
शिक्षा, धर्म-अध्यात्म, चिकित्सा-सेवा, सरकारी सेवा, food व परामर्श पुष्य के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। जहाँ भरोसा चाहिए वहाँ पुष्य-जातक ही खोजे जाते हैं। धीमी पर स्थायी उन्नति इनका पैटर्न है — तुलना से बचें, अपनी गति पर विश्वास रखें।
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