पुष्य नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
पुष्य नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश
पुष्य नक्षत्र का द्वितीय चरण कर्क राशि के 6°40′ से 10°00′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कन्या नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी बुध है।
नक्षत्र-स्वामी शनि और चरण (नवांश) का स्वामी बुध परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।
कन्या-नवांश का रंग: बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित, तर्क, लेखन, त्वचा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
पुष्य को नक्षत्रों में सर्वाधिक शुभ माना गया है — बृहस्पति का पोषक नक्षत्र। इसके जातक धर्मपरायण, सेवा-भावी, विश्वसनीय और दूसरों का पालन-पोषण करने वाले होते हैं। गाय के थन का प्रतीक ही कहता है — देना इनका स्वभाव है। आत्म-मूल्य कम न आँकें।
चरण-विशेष: कन्या नवांश की पृथ्वी-तत्व द्विस्वभाव प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «हे» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (पुष्य के चारों चरणों के अक्षर: हू, हे, हो, डा)
करियर-दिशा
शिक्षा, धर्म-अध्यात्म, चिकित्सा-सेवा, सरकारी सेवा, food व परामर्श पुष्य के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। जहाँ भरोसा चाहिए वहाँ पुष्य-जातक ही खोजे जाते हैं। धीमी पर स्थायी उन्नति इनका पैटर्न है — तुलना से बचें, अपनी गति पर विश्वास रखें।
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