श्रवण नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
श्रवण नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश
श्रवण नक्षत्र का द्वितीय चरण मकर राशि के 13°20′ से 16°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र वृषभ नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शुक्र है।
नक्षत्र-स्वामी चंद्र और चरण (नवांश) का स्वामी शुक्र परस्पर सम हैं — सम-भाव से चरण संतुलित रहता है।
वृषभ-नवांश का रंग: प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
श्रवण के जातक श्रेष्ठ श्रोता, ज्ञान-पिपासु और परंपरा-वाहक होते हैं — विष्णु का नक्षत्र 'सुनकर सीखने' की सिद्धि देता है। शब्द, स्वर व शास्त्र से गहरा नाता रहता है। दूसरों की बातें गहराई से पकड़ते हैं — इसीलिए सलाहकार सहज बनते हैं। सुनी-सुनाई पर तुरंत विश्वास न करें।
चरण-विशेष: वृषभ नवांश की पृथ्वी-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «खू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (श्रवण के चारों चरणों के अक्षर: खी, खू, खे, खो)
करियर-दिशा
शिक्षा, संगीत-audio, media-communication, अनुवाद, परामर्श व धार्मिक-संस्थाएँ श्रवण के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। ज्ञान जोड़ना और बाँटना — दोनों में समान रुचि है। निरंतर-शिक्षा (lifelong learning) ही इनके करियर की रीढ़ है।
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