श्रवण नक्षत्र चतुर्थ चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
श्रवण नक्षत्र चतुर्थ चरण — स्थिति व नवांश
श्रवण नक्षत्र का चतुर्थ चरण मकर राशि के 20°00′ से 23°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कर्क नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी चंद्र है।
नक्षत्र-स्वामी चंद्र और चरण (नवांश) का स्वामी चंद्र एक ही ग्रह हैं — यह चरण नक्षत्र का शुद्धतम, «वर्गोत्तम-भाव» वाला चरण माना जाता है; नक्षत्र के गुण यहाँ सबसे गहरे उतरते हैं।
कर्क-नवांश का रंग: मन, माता, भावना, जल, मानसिक शांति, जनता के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
श्रवण के जातक श्रेष्ठ श्रोता, ज्ञान-पिपासु और परंपरा-वाहक होते हैं — विष्णु का नक्षत्र 'सुनकर सीखने' की सिद्धि देता है। शब्द, स्वर व शास्त्र से गहरा नाता रहता है। दूसरों की बातें गहराई से पकड़ते हैं — इसीलिए सलाहकार सहज बनते हैं। सुनी-सुनाई पर तुरंत विश्वास न करें।
चरण-विशेष: कर्क नवांश की जल-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «खो» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (श्रवण के चारों चरणों के अक्षर: खी, खू, खे, खो)
करियर-दिशा
शिक्षा, संगीत-audio, media-communication, अनुवाद, परामर्श व धार्मिक-संस्थाएँ श्रवण के श्रेष्ठ क्षेत्र हैं। ज्ञान जोड़ना और बाँटना — दोनों में समान रुचि है। निरंतर-शिक्षा (lifelong learning) ही इनके करियर की रीढ़ है।
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