शुक्र महादशा में सूर्य अंतर्दशा: फल, अवधि व उपाय
शुक्र महादशा में सूर्य अंतर्दशा — अवधि व स्वरूप
विंशोत्तरी क्रम में शुक्र की महादशा 20 वर्ष चलती है — यह काल प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के विषयों का अध्याय है। इसके भीतर सूर्य की अंतर्दशा 1 वर्ष की होती है (सूत्र: 20×6÷120 वर्ष) — इस अवधि में अध्याय वही रहता है, पर विषय सूर्य (आत्मा, पिता, राजा/सरकार, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, नेतृत्व) तय करता है।
महादशा-स्वामी शुक्र के अध्याय में सूर्य अपने कारकत्व — आत्मा, पिता, राजा/सरकार, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, नेतृत्व — के विषय सामने लाता है। शुक्र सूर्य को शत्रु मानता है — अवधि में खींचतान/मत-परिवर्तन सामान्य है; धैर्य रखें।
फल कैसे पढ़ें — असली नियम
फल ग्रह के नाम से नहीं, आपकी कुंडली में उसकी स्थिति से तय होता है: सूर्य जिन भावों का स्वामी है, जहाँ बैठा है और जिस नक्षत्र में है — अंतर्दशा उन्हीं विषयों को छूती है; शुक्र की महादशा उसे अपना संदर्भ (अध्याय) देती है।
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इस अवधि के सामान्य उपाय
सूर्य (अंतर्दशा-स्वामी): सूर्य को बल देने हेतु प्रातः सूर्योदय पर जल-अर्घ्य (ताँबे के लोटे से), 'ॐ सूर्याय नमः' या आदित्य-हृदय-स्तोत्र का पाठ, रविवार व्रत तथा पिता व गुरुजनों का सम्मान श्रेष्ठ उपाय हैं। रत्न माणिक्य (Ruby) सोने में, अनामिका में, रविवार प्रातः धारण किया जाता है — पर कुंडली-परीक्षण के बाद ही। गुड़-गेहूँ का दान व सूर्य-नमस्कार भी लाभकारी है।
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