🌳 ग्रह-फल

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र प्रथम चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र प्रथम चरण — स्थिति व नवांश

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का प्रथम चरण मीन राशि के 3°20′ से 6°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र सिंह नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी सूर्य है।

नक्षत्र-स्वामी शनि और चरण (नवांश) का स्वामी सूर्य परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।

सिंह-नवांश का रंग: आत्मा, पिता, राजा/सरकार, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, नेतृत्व के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

उत्तरा भाद्रपद के जातक गहन-शांत, क्षमाशील, त्यागी और गूढ़ ज्ञान वाले होते हैं — अहिर्बुध्न्य (गहराई का सर्प) का नक्षत्र समुद्र-तल की स्थिरता देता है। क्रोध दुर्लभ है, पर आए तो प्रलय। दूसरों के भार चुपचाप उठा लेते हैं। अपनी आवश्यकताएँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं — कहना सीखें।

चरण-विशेष: सिंह नवांश की अग्नि-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «दू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (उत्तरा भाद्रपद के चारों चरणों के अक्षर: दू, थ, झ, ञ)

करियर-दिशा

अध्यात्म-योग, परामर्श-चिकित्सा, धर्मार्थ-संस्थाएँ, research व दीर्घ-निवेश उत्तरा भाद्रपद के अनुकूल हैं। संकट में इनकी स्थिरता संस्था बचा लेती है। एकांत-साधना से शक्ति मिलती है — दिनचर्या में उसका स्थान सुरक्षित रखें।

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