उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का तृतीय चरण मीन राशि के 10°00′ से 13°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र तुला नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शुक्र है।
नक्षत्र-स्वामी शनि और चरण (नवांश) का स्वामी शुक्र परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।
तुला-नवांश का रंग: प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
उत्तरा भाद्रपद के जातक गहन-शांत, क्षमाशील, त्यागी और गूढ़ ज्ञान वाले होते हैं — अहिर्बुध्न्य (गहराई का सर्प) का नक्षत्र समुद्र-तल की स्थिरता देता है। क्रोध दुर्लभ है, पर आए तो प्रलय। दूसरों के भार चुपचाप उठा लेते हैं। अपनी आवश्यकताएँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं — कहना सीखें।
चरण-विशेष: तुला नवांश की वायु-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «झ» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (उत्तरा भाद्रपद के चारों चरणों के अक्षर: दू, थ, झ, ञ)
करियर-दिशा
अध्यात्म-योग, परामर्श-चिकित्सा, धर्मार्थ-संस्थाएँ, research व दीर्घ-निवेश उत्तरा भाद्रपद के अनुकूल हैं। संकट में इनकी स्थिरता संस्था बचा लेती है। एकांत-साधना से शक्ति मिलती है — दिनचर्या में उसका स्थान सुरक्षित रखें।
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