उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश
उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का द्वितीय चरण कन्या राशि के 0°00′ से 3°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मकर नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शनि है।
नक्षत्र-स्वामी सूर्य और चरण (नवांश) का स्वामी शनि परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।
मकर-नवांश का रंग: कर्म, न्याय, आयु, अनुशासन, सेवक, दुःख, तेल-लोहा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।
स्वभाव पर प्रभाव
उत्तरा फाल्गुनी के जातक वचन-निष्ठ, परोपकारी और स्थायी संबंधों को महत्व देने वाले होते हैं — अर्यमा (मैत्री-अनुबंधों के देवता) का नक्षत्र। सहायता माँगने पर मना नहीं कर पाते। विवाह-साझेदारी इनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय होती है। स्वार्थी लोगों से सीमा रखें।
चरण-विशेष: मकर नवांश की पृथ्वी-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।
नामाक्षर (नामकरण हेतु)
इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «टो» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (उत्तरा फाल्गुनी के चारों चरणों के अक्षर: टे, टो, पा, पी)
करियर-दिशा
समाज-सेवा, प्रशासन, परामर्श, बैंकिंग, विवाह-सेवाएँ व साझेदारी-व्यवसाय उत्तरा फाल्गुनी के अनुकूल हैं। दिए वचन निभाने की छवि ही इनकी पूँजी है। अनुबंध लिखित रखें — भलमनसाहत का अनुचित लाभ न उठने दें।
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