🌳 ग्रह-फल

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र तृतीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र तृतीय चरण — स्थिति व नवांश

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का तृतीय चरण कन्या राशि के 3°20′ से 6°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र कुंभ नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शनि है।

नक्षत्र-स्वामी सूर्य और चरण (नवांश) का स्वामी शनि परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।

कुंभ-नवांश का रंग: कर्म, न्याय, आयु, अनुशासन, सेवक, दुःख, तेल-लोहा के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

उत्तरा फाल्गुनी के जातक वचन-निष्ठ, परोपकारी और स्थायी संबंधों को महत्व देने वाले होते हैं — अर्यमा (मैत्री-अनुबंधों के देवता) का नक्षत्र। सहायता माँगने पर मना नहीं कर पाते। विवाह-साझेदारी इनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय होती है। स्वार्थी लोगों से सीमा रखें।

चरण-विशेष: कुंभ नवांश की वायु-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «पा» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (उत्तरा फाल्गुनी के चारों चरणों के अक्षर: टे, टो, पा, पी)

करियर-दिशा

समाज-सेवा, प्रशासन, परामर्श, बैंकिंग, विवाह-सेवाएँ व साझेदारी-व्यवसाय उत्तरा फाल्गुनी के अनुकूल हैं। दिए वचन निभाने की छवि ही इनकी पूँजी है। अनुबंध लिखित रखें — भलमनसाहत का अनुचित लाभ न उठने दें।

🔮 अपनी कुंडली में देखें

यह स्थिति आपकी अपनी कुंडली में है या नहीं — ग्रह, दशा व घटना-समय सहित तुरंत निःशुल्क जाँचें।

निःशुल्क कुंडली बनाएँ →

उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का पूर्ण परिचय · नक्षत्र-स्वामी सूर्य का परिचय · अपना जन्म-नक्षत्र व चरण जानें (निःशुल्क) · नवांश (D9) क्या है · राशि-नक्षत्र अनुसार बच्चों के नाम

🌐 Read this page in English