🌳 ग्रह-फल

विशाखा नक्षत्र प्रथम चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

विशाखा नक्षत्र प्रथम चरण — स्थिति व नवांश

विशाखा नक्षत्र का प्रथम चरण तुला राशि के 20°00′ से 23°20′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र मेष नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी मंगल है।

नक्षत्र-स्वामी गुरु और चरण (नवांश) का स्वामी मंगल परस्पर मित्र हैं — दोनों की मैत्री से नक्षत्र-गुण सहज खिलते हैं।

मेष-नवांश का रंग: भाई, साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त, पराक्रम, विवाद के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

विशाखा के जातक लक्ष्य-केंद्रित, महत्वाकांक्षी और विजय-संकल्प वाले होते हैं — इंद्राग्नि का नक्षत्र दोहरी शक्ति (बल+तेज) देता है। तोरण-द्वार का प्रतीक कहता है: विजय निकट है, बस अंतिम चरण का धैर्य चाहिए। ईर्ष्या व अधैर्य से बचें — यही दो शत्रु हैं।

चरण-विशेष: मेष नवांश की अग्नि-तत्व चर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «ती» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (विशाखा के चारों चरणों के अक्षर: ती, तू, ते, तो)

करियर-दिशा

राजनीति, वक्तृत्व-अभिनय, sales-marketing, क़ानून व प्रतिस्पर्धी क्षेत्र विशाखा को फलते हैं। लक्ष्य दो तो पूरा करके लौटते हैं। सफलता के बाद का ख़ालीपन इनकी चुनौती है — अगला सार्थक लक्ष्य पहले से तय रखें।

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