🌳 ग्रह-फल

विशाखा नक्षत्र द्वितीय चरण: नवांश, नामाक्षर व फल

विशाखा नक्षत्र द्वितीय चरण — स्थिति व नवांश

विशाखा नक्षत्र का द्वितीय चरण तुला राशि के 23°20′ से 26°40′ अंश तक फैला है। हर चरण 3°20′ का होता है — ठीक एक नवांश — इसलिए इस चरण में जन्मे जातक का नवांश-लग्न/चंद्र वृषभ नवांश में पड़ता है, जिसका स्वामी शुक्र है।

नक्षत्र-स्वामी गुरु और चरण (नवांश) का स्वामी शुक्र परस्पर शत्रु हैं — वैर से गुणों में भीतरी खिंचाव आता है — जातक में नक्षत्र-स्वभाव कुछ दबे/बदले रूप में दिखता है।

वृषभ-नवांश का रंग: प्रेम, विवाह, सौंदर्य, कला, विलास, वाहन, सुख के गुण नक्षत्र-स्वभाव में घुलते हैं।

स्वभाव पर प्रभाव

विशाखा के जातक लक्ष्य-केंद्रित, महत्वाकांक्षी और विजय-संकल्प वाले होते हैं — इंद्राग्नि का नक्षत्र दोहरी शक्ति (बल+तेज) देता है। तोरण-द्वार का प्रतीक कहता है: विजय निकट है, बस अंतिम चरण का धैर्य चाहिए। ईर्ष्या व अधैर्य से बचें — यही दो शत्रु हैं।

चरण-विशेष: वृषभ नवांश की पृथ्वी-तत्व स्थिर प्रकृति इस स्वभाव को अपनी रंगत देती है — एक ही नक्षत्र के चारों चरण इसीलिए एक-से नहीं होते।

नामाक्षर (नामकरण हेतु)

इस चरण का शास्त्रीय नामाक्षर «तू» है — परंपरा में जन्म-नक्षत्र-चरण के अक्षर से नाम रखना शुभ माना जाता है। (विशाखा के चारों चरणों के अक्षर: ती, तू, ते, तो)

करियर-दिशा

राजनीति, वक्तृत्व-अभिनय, sales-marketing, क़ानून व प्रतिस्पर्धी क्षेत्र विशाखा को फलते हैं। लक्ष्य दो तो पूरा करके लौटते हैं। सफलता के बाद का ख़ालीपन इनकी चुनौती है — अगला सार्थक लक्ष्य पहले से तय रखें।

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