लहसुनिया केतु का रत्न है — मोक्ष, गूढ़-विद्या, सूक्ष्म-बुद्धि और आकस्मिक रक्षा का कारक। कुंडली में केतु पीड़ा दे — दिशाहीनता, रहस्यमय स्वास्थ्य-विषय, अचानक हानि — या केतु महादशा-अंतर्दशा चले, तो लहसुनिया केतु-ऊर्जा को साधकर स्थिरता और अंतर्दृष्टि देता है। साधकों व शोधकर्ताओं में इसका विशेष विचार है।
परंपरा में गुरुवार/शनिवार रात्रि को, चाँदी/पंचधातु में, दाएँ हाथ की मध्यमा या कनिष्ठा में धारण किया जाता है। अभिमंत्रण «ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः» से। भार प्रायः सवा 3 से सवा 7 रत्ती (कुंडली-अनुसार)।
🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
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नहीं। यह केतु की शक्ति बढ़ाता है; तभी पहनें जब केतु आपकी कुंडली में शुभ हो — निःशुल्क कुंडली व ज्योतिषी से जाँच लें।
चाँदी/पंचधातु में, दाएँ हाथ की कनिष्ठा या मध्यमा में, मंगलवार/शनिवार रात्रि; «ॐ कें केतवे नमः» 108 बार; 3–5 रत्ती।