लाल मूँगा मंगल का रत्न है — साहस, ऊर्जा, भूमि, रक्त और पराक्रम का कारक। कुंडली में मंगल शुभ-कारक होकर निर्बल हो — साहस-कमी, थकान, रक्त-विकार, भूमि-वाहन में अड़चन — तो मूँगा मंगल-अग्नि जगाकर कर्मठता और विजय-बल देता है। मांगलिक-विचार व ऋण-मोचन की विधियों में भी परंपरा से इसका स्थान है।
मंगलवार को शुक्ल-पक्ष में, सोने/ताँबे में, दाएँ हाथ की अनामिका में धारण की परंपरा है। अभिमंत्रण «ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः» से। भार प्रायः सवा 5 से सवा 9 रत्ती (कुंडली-अनुसार)। शनि-बुध के रत्नों के साथ प्रायः नहीं पहना जाता।
🕉 हमारा वचन: हर रत्न ग्रहों के अनुसार अभिमंत्रित करके, पूर्णतया वैदिक ज्योतिष विधि से सिद्ध करके ही भेजा जाता है।
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